वैज्ञानिक पद्धति से जैविक खेती अपनाकर बदली किस्मत किसान धनऊ बंजारे को विष्णुभोग धान से मिली नई पहचान

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वैज्ञानिक पद्धति से जैविक खेती अपनाकर बदली किस्मत किसान धनऊ बंजारे को विष्णुभोग धान से मिली नई पहचान

 वैज्ञानिक पद्धति से जैविक खेती अपनाकर बदली किस्मत

किसान धनऊ बंजारे को विष्णुभोग धान से मिली नई पहचान

मुंगेली (राजेन्द्र प्रजापति)वैज्ञानिक तरीके से अपनाई गई जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती है। ग्राम टिकैतपेण्ड्री, विकासखण्ड पथरिया, जिला मुंगेली के कृषक  धनऊ बंजारे ने वैज्ञानिक पद्धति से जैविक खेती अपनाकर न केवल कीट-रोग की समस्या से छुटकारा पाया, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। करीब 0.765 हेक्टेयर भूमि के छोटे कृषक  बंजारे पहले रासायनिक खेती करते थे, जिससे फसल में कीट एवं रोग का प्रकोप बना रहता था और लागत भी अधिक आती थी। लगातार हो रही समस्याओं के समाधान हेतु उन्होंने कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी  गेंदलाल पात्रे एवं  एल. के. कोशले से संपर्क किया। अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने राज्य पोषित जैविक खेती मिशन के अंतर्गत सुगंधित धान की किस्म विष्णुभोग को अपनाया।

     जैविक खेती के अंतर्गत उन्होंने प्रमाणित बीज का उपयोग, ट्रायकोडर्मा से बीज उपचार, पी.एस.बी. कल्चर का प्रयोग, तथा समय पर जिंक सल्फेट का उपयोग किया। साथ ही खेत की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई एवं फसल की गभोट अवस्था में प्रति एकड़ 02 किलो बोरान का छिड़काव किया गया। इन सभी वैज्ञानिक उपायों के परिणामस्वरूप फसल स्वस्थ रही और कीट-व्याधियों का प्रकोप नगण्य रहा।  धनऊ बंजारे ने बताया कि जैविक खेती से उत्पादन लागत घटी, उपज की गुणवत्ता बेहतर हुई और बाजार में धान का अच्छा मूल्य मिला। इससे उनकी आमदनी बढ़ी और जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया। यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।

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